Saturday, July 11, 2009

एटीएम या बैंक से निकाले गए पांच सौ या हजार रुपये के नोट भी नकली हो सकते हैं। नकल भी ऐसी जो असल को मात करे। नकली नोटों में भी वे सारे सुरक्षा चिह्न मौजूद मिलेंगे जिनके आधार पर नकली और असली नोटों की पहचान होती है। इसके मद्देनजर गृह सचिव जी.के. पिल्लई को देश की सभी खुफिया व जांच एजेंसियों के प्रमुखों समेत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलानी पड़ी।
बैठक में फैसला हुआ कि नेपाल और बांग्लादेश के बार्डर से लगे सभी निजी और सार्वजनिक बैंकों में जल्द से जल्द विशेष जर्मन मशीन लगाई जाए। दरअसल, नए नकली नोटों में असली नोटों के सभी सुरक्षा मानक पाए जा रहे हैं। सिर्फ एक सुरक्षा मानक ऐसा है जिसकी नकल नहीं की जा सकी है। वह है नोट पर बना महात्मा गांधी की तस्वीर का वाटर मार्क। नकली नोटों में यह वाटर मार्क बाहर से दबा कर बनाया जाता है, जो दिखने में असली वाटर मार्क जैसा ही नजर आता है। इस अंतर को सिर्फ जर्मनी में बनी एक खास मशीन के जरिये ही पकड़ा जा सकता है।
खुफिया एजेंसियों ने उन प्रमुख रास्तों की पहचान भी की, जिनसे नकली नोट देश के अंदर भेजे जा रहे हैं। खुफिया राजस्व निदेशालय यानी डीआरआई व कस्टम विभाग को इन रास्तों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें महत्वपूर्ण हवाईअड्डों पर अपने कार्यालय खोलने को भी कहा गया है। गृह मंत्रालय ने खुफिया ब्यूरो और रा को नकली नोटों के कारोबार के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने को कहा है। इस कड़ी में रा को खाड़ी के देशों समेत नेपाल, बांग्लादेश, कोलंबो, बैंकाक, क्वालालंपुर जैसे देशों पर खास तौर पर नजर रखने के लिए कहा गया है। ये देश नकली नोट भारत भेजने के प्रमुख अड्डों के रूप में कुख्यात हैं। खुफिया ब्यूरो को मुख्य तौर पर नेपाल और बांग्लादेश बार्डर से लगे इलाकों में संदिग्ध लोगों पर खास नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
ईमेल करें
मैसेंजर के द्वारा भेजें
प्रिंट संस्‍करण
खबर को दर्जा दें


आपका वोट:



औसत वोट (232 वोट)


-->
var oElement = document.getElementById("ImStory");
function fnCallback(e) {return YAHOO.Media.Dtk.ArticleTools.IM.imStory('%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%80%20%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87%20%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%80%20%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%82%20%e0%a4%a8%e0%a5%87%20%e0%a4%89%e0%a5%9c%e0%a4%be%e0%a4%88%20%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6', 'http://in.jagran.yahoo.com/news/business/general/1_12_5613081.html') }
YAHOO.util.Event.addListener(oElement, "click", fnCallback);
लेख को दर्जा दें
दर्जा दें
0 out of 5 blips
(22) वोट का औसत
average:4.545454
Saving...

Saturday, July 4, 2009

इस साल जनवरी में मुम्बई शेयर सूचकांक जब 21,000 अंकों की सीमा पारकर 22,000 की चढ़ाई चढ़ रहा था कि अचानक तेजड़ियों का स्वाद बिगड़ गया और गिरावट का दौर शुरू हो गया। बीते सप्ताह एक समय यह 13,000 से भी नीचे चला गया। सप्ताहांत यह 13,454 अंक पर बंद हुआ, जो कि वर्ष के सर्वोच्च स्तर 21,150 अंक की तुलना में 36.35 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
रिलायंस समूह के मुकेश अम्बानी, अनिल अम्बानी, डीएलएफ के के.पी.सिंह, सॉफ्टवेयर कम्पनी विप्रो के अजीम प्रेमजी और दूरसंचार क्षेत्र में कीर्तिमान बनाने वाले सुनील भारती मित्तल की दौलत पिछले पाँच-छह महीनों की मंदी से 50 से 55 खरब रुपये घट चुकी है। शेयर बाजार जब पूरे उफान पर था तो इन पाँचों धनपतियों की शेयर दौलत 130 खरब रुपये के शीर्ष पर थी, जो कि अब घटकर 8
0 से 85 खरब रुपये के आस-पास रह गई है।
पूँजी बाजार पर नजर रखने वाली संस्था प्राइम डाटा बेस के प्रमुख पृथ्वी हल्दिया कहते हैं, `बाजार तो नीचे आना ही था, जिस रफ्तार से तेजी बनी हुई थी वह सामान्य नहीं थी।' बाजार अपनी वास्तविक स्थिति में आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार से हाथ खींच लिए। पिछले चार-पाँच महीनों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि कम्पनियों का मुनाफा बढ़ा 20 प्रतिशत, लेकिन उसके शेयरों के दाम चढ़ गए 40 प्रतिशत तक, ऐसी स्थिति ज्यादा दिन नहीं चल सकती। `मोटी रकम लगाने वाले मुनाफा तो काटेंगे ही।'
छले छह महीनों में संवेदी सूचकांक में 7,500 से अधिक अंक की गिरावट आ चुकी है। कई जानी-मानी कम्पपिनियों के शेयर 70 से 75 प्रतिशत तक नीचे लुढ़क चुके हैं। इसकी वजह चाहे कुछ भी हो, लेकिन आम निवेशक इस मंदी में तेजड़ियों और विदेशी निवेशकों द्वारा बुने जाल में फँसकर बाजार सूचकांक की गिरावट रुकने और उसके ऊपर उठने की आस लगाए बैठ गया है। यहाँ तक म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों की उम्मीदों पर भी कुठाराघात हुआ है।
निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान अनिल अम्बानी समूह की कम्पनी रिलायंस पॉवर लिमिटेड में हुआ। रिलायंस पॉवर लिमिटेड इस साल की शुरुआत में सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बाजार में लेकर आई। छोटे निवेशकों को कम्पनी ने दस रुपये का शेयर 430 रुपये में दिया। बाद में बाजार की मंदी को देखते हुए
कम्पनी ने निवेशकों को प्रत्येक पाँच शेयर पर तीन बोनस शेयर दिए। इस लिहाज से औसत शेयर मूल्य 270 रुपये तक आ गया, लेकिन कम्पनी का बाजार भाव 127 रुपये पर धक्के खा रहा है। पिछले एक साल के उच्चतम भाव की तुलना में इसमें 66 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है।
रिलायंस कैपिटल 70 प्रतिशत घटकर 874 रुपये पर आ गई, जबकि एक साल में इसका ऊँचा भाव 2,925 रुपये तक पहुँच चुका था। इसी समूह की रिलायंस कम्युनिकेशंस का शेयर मूल्य 844 रुपये के उच्चतम भाव से 53 प्रतिशत घटकर 396 रुपये पर चल रहा है।
मुकेश अम्बानी समूह की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर एक साल के उच्चतम स्तर की तुलना में 37 प्रतिशत घटकर 2,045 रुपये पर बोला जा रहा है, जबकि रिलायंस पेट्रोलियम उच्चतम स्तर से 43 प्रतिशत घटकर 166 रुपये पर है, लेकिन इसी समूह की रिलायंस इंडस्ट्रियल इंफास्ट्रक्चर लि. 76 प्रतिशत तक घटकर 767 रुपये रह गया है।
सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल का शेयर मूल्य, जो कि पिछले एक साल में 1,149 रुपये की ऊँचाई नाप चुका था अब 688 रुपये के आस-पास चल रहा है। के.पी.सिंह की कम्पनी डीएलएफ बड़े जोर-शोर के साथ पूँजी बाजार में उतरी थी। कम्पनी ने निवेशकों को 530 रुपये का शेयर दिया था अब यह 368 रुपये के आस-पास चल रहा है। डीएलएफ का शेयर 1,225 रुपये तक चढ़ने के बाद 70 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ अब 368 रुपये पर बोला जा रहा है।
यही नहीं, सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों के शेयर मूल्य भी भारी गिरावट में चल रहे हैं। एचडीएफसी 3,255 रुपये की ऊँचाई छूने के बाद फिलहाल 1,835 रुपये रह गया है। आईएफसीआई 140 रुपये तक चढ़ चुका था इन दिनों 31 रुपये पर धक्का खा रहा है। जिंदल स्टील 3,355 रुपये की ऊँचाई छूने के बाद फिलहाल 1,640 रुपये के आस-पास चल रहा है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम का शेयर मूल्य 1,400 रुपये तक चढ़ने के बाद अब 800 रुपये से नीचे चल रहा है। टाटा पावर साल के ऊँचे भाव से 38 प्रतिशत, टाटा स्टील और टाटा कंसल्टेंसी क्रमश 28 और 29 प्रतिशत नीचे आ गए। हल्दिया के मुताबिक, बाजार के बारे में कभी भी कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। एक ही समय में बाजार तेजी की चाल भी चल सकता है और मंदी की वजह बताकर गिर भी सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में चारों तरफ मंदी की अनेक वजह गिनाई जा सकती हैं।
अमेरिका के साथ परमाणु करार को लेकर सरकार खतरे में है। दुनियाभर में मंदी की आशंका बनी है। ब्याज दरें बढ़ने से कम्पनियों के कारोबार पर असर पड़ने की बातें हो रही हैं। महँगाई का मुद्दा लोगों के

Saturday, March 8, 2008